14 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि एवं लाभ

14 mhukhi rudraksha
चौदहमुखी रुद्राक्ष

अति दुर्लभ और परम प्रभावशाली तथा अल्प समय में ही शिवजी का सान्निध्य प्रदान करने वाला यह रुद्राक्ष साक्षात देवमणि है। इसके प्रभाव से साधक समस्त संकटों से उक्त रहता है। हानि, दुर्घटना, रोग और चिंता से मुक्त रखकर साधक को सुरक्षा-समृद्धि करना इसका विशेष गुण है।
14 mhukhi rudraksha
1.9 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि एवं लाभ
2.7 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि एवं लाभ
3.छहमुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि संस्कृत श्लोकों, मन्त्रों द्वारा

चतुर्दशास्यो रुद्राक्षो यदि लभ्येत पुत्रक,
धारयेत्स ततं मूर्धिन तस्य पिंड शिवस्यतु।

हे पुत्र! यदि चौदहमुख वाला रुद्राक्ष मिल जाए, तो उसे सिर पर धारण करने से मन शिव के शरीर के स्वरूप होता है।
कि मुने बहुनोक्तेन वर्णनेन पुनः पुनः,
पज्यते सततं देवैः प्राप्यते च पराक्षगिः।
रुदाक्ष एकः शिरसा धार्यो भक्तया द्विजोत्तमैः ।

हे मुने ! हमने बार-बार वर्णन करने से क्या है,एक ही रुद्राक्ष सिर पर भक्ति से धारण मनष्य भक्त देवताओं से पूजित होकर परमगति को प्राप्त होता है।
चौदहमखी रुदाक्ष रुद्र के नेत्र से प्रगट हुआ, ऐसा माना जाता है। इसके अनंत गुण है इसको धारण करने मात्र से बहुत मान-सम्मान मिलता है। यह साक्षात् परमशिव रूप है, जिसे धारण करने से सब प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती हैं। इसे निम्न मंत्र से धारण करना चाहिए –

14 mukhi rudraksha

“ओम् नमः”

14 मुखी रुद्राक्ष के धारण करने की विधि

ॐ औं हस्] खक्र हस्रौं हस। इति मन्त्रः।

अस्य श्रीहनुमन्त्रस्य रामचन्द्र ऋषि: जगती छन्दः श्री हनुमद्देवता औं बीज हस्] शक्ति: अभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोगः। रामचन्द्र ऋषये नमः शिरसि। जगती छन्दसे नमो मुखे। हनुमद्देवतायै नमो हृदि। औं बीजाय नमो गुहो। हस्] शक्तये नमः पादयोः (अथ करन्यासः) ॐ ॐ अगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ औं तर्जनीभ्यां स्वाहा ॐ हस्] मध्यमाभ्यां वषट् ॐ खळ अनामिकाभ्यां हूँ। ॐ हस्रौं कनिष्ठिकाभ्यां वौषट्, ॐ ॐ हस. करतलकरपृष्ठाभ्यां फट्। (अथाङ्गन्यास:) ॐ ॐ हृदयाय नमः। औं शिरसे स्वाहा। ॐ हम शिखायै वषट् । ॐ खा कवचाय हुँ। ॐ ह्रसः अस्त्राय फट्। (अथ ध्यानम्)। उद्यन्मार्तण्डकोटिप्रकटरुचियुतं चारुवीराशनस्थं ौजीयज्ञोपवीताभरणरुचिशिखाशौभितं कुण्डलाभ्याम् भक्तानामिष्टदानप्रवणमनुदिनं वेदनादप्रमोद ध्यायैद्येव विधेयं प्लवगकुलपति गोपदीभूतवाद्धिम्।

एतेमन्त्रैः क्रमेणकमुखादिधारणं नमः।

इन मन्त्रों से क्रमानुसार करके एक मुखी से लेकर चतुर्दश मुखी रुद्राक्ष धारण कर नमस्कार करें।

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