6 mukhi rudraksha धारण करने की विधि,मन्त्रों द्वारा

छहमुखी रुद्राक्ष 6 mukhi rudraksha

शिवजी के पुत्र कार्तिकेय की शक्ति का केंद्र-बिन्दु छहमुखी रुद्राक्ष-विद्या, बद्धि, ज्ञान का प्रदाता माना गया है। इसके साथ ही, यह विभिन्न प्रकार के सांसारिक क्लेशों से भी रक्षा करता है। उन बच्चों को, जो पढ़ने में कमजोर हों, यदि यह दाना विधिवत् धारण करा दिया जाए, तो उनकी मेधाशक्ति में अद्भुत परिवर्तन हो जाता है।

छहमुखी रुद्राक्ष के साथ ही यदि एक दाना चारमुखी भी पहन लिया जाय, तो बौद्धिक-शक्ति के विकास में निश्चित सफलता प्राप्त होती है।
छहमुखी रुद्राक्ष के धारण और पूजन के लिए मंत्र आगे दिया जाएगा।

रुद्राक्षधारणदेव रुद्रो रुद्रत्वामाप्नुयात्,
मुनयः सत्यसंकल्पा ब्रह्मा ब्रह्मत्वमागतः

रुद्राक्ष धारण करने से ही रुद्र भी रुद्रत्व को प्राप्त होते हैं। मुनि सत्य-संकल्प को प्राप्त करते हैं और ब्रह्मा भी ब्रह्मत्व को प्राप्त हुए।

षडवकाः कार्तिकेय स धार्यों दक्षिणे करे,
ब्रह्महत्यामिः पापैर्मुच्यते नात्र संशयः।

छह मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात् कार्तिकेय है। इसको दक्षिण हाथ में धारण करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य ब्रह्माहत्या से छूट जाता है, इसमें संदेह नहीं है।

6 mukhi rudraksha

रुद्राक्षं धारयेमूर्धिन कंठे सूत्रे करेऽथवा,
सुवर्णमणिसंभिन्नं शुद्ध व न्यैधृतं शिवम्।
नाशुचिधारयेदक्षं सदा भक्तयैव धारयेत्,
रुद्राक्षतरुसंतवातोद्भूतमृणां यपि,
पुण्यलोकं गमिष्यंति पुनरावृत्तिदुर्लभम।।

रुद्राक्ष को सिर में, कंठ में, यज्ञोपवीत में और हाथ में धारण करें। सुवर्ण से युक्त रुद्राक्ष धारण भी शुद्ध है और कुल मिला कर न धारें। अशुचि होकर रुद्राक्ष धारण न करें।
सदा भक्ति से धारण करें। रुद्राक्ष के वृक्ष से लगी हुई वायु के तिनके भी पुण्यलोक को प्राप्त होते हैं, जिनका पुनर्जन्म नहीं होता।

शिवभक्ताय शांताय दद्याद्रुद्राक्षषुत्तमम्,
तस्य पुण्यफल स्यातं नचा ह वक्तुमुत्सहे।
धृतरुद्राक्षकंठाय यस्तवंनंसंप्रयच्छतित्रि;
सप्तकुलमुद्धृत्य रुद्रलोकं स गच्छति।।


शिवभक्त को शांति के निमित्त उत्तम रुद्राक्ष देने चाहिए। उसके पुण्यफल की अनंतता को कोई नहीं कह सकता। कंठ में रुद्राक्ष धारण किये हुए पुरुष को जो अन्न देता है, वो सात कुलों का उद्धार कर रुद्रलोक को जाता है।

1.पांच मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि एवं लाभ
2.चार मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि एवं लाभ

षष्टमुखी (छह मुख वाले) रुद्राक्ष के देवता कार्तिकेय हैं। कई बुद्धिमान इसके देवता गणेश को भी मानते हैं, किन्तु इसके धारण करने से दोनों प्रसन्न होते हैं।
छहमुखी रुद्राक्ष को बाएं हाथ में धारण करने से ब्रह्महत्या दूर हो जाने की शक्ति का वर्णन मिलता है।

छहमुखी रुद्राक्ष के धारण करने की विधि

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सौं ऐं। इति मन्त्रः। अस्य श्रीमन्त्रस्य दक्षिणा मूर्ति ऋषि पंक्तिछन्द: कार्तिकेयदेवता ऐं बीजं सौं शक्तिः क्लीं कीलकं अभीष्ट सिद्धयर्थे रुद्राक्ष धारणार्थे जपे विनियोगः। दक्षिण मूर्तिऋषयेनमः शिरसि, पंक्तिच्छन्दसे नमो मुखे। कार्तिकेयदेवतायै नमो हृदय, ऐं बीजाय नमो गुहो। सौं शक्तये नमः पादयोः (अथ करन्यास:) ॐ ॐ अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां स्वाहा ॐ श्रीं मध्यामाभ्यां वषट् । ॐ क्लीं अनामिकाभ्यां हुं। ॐ सौं कनिष्ठकाभ्यां वौषट्। ॐ करतलकर पृष्ठाभ्यां फट् (अथाङ्गन्यास:) ॐ ॐ हृदयाय नमः ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा। ॐ श्रीं शिखायै वषट् । क्लीं कवचाय हुं। ॐ सौं नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ ऐं अस्त्राय फट् (अथ ध्यानम्) क्रौंचपर्वतविदारणलोलो दानवेन्द्रवनिताकृतलण्डः। चूतपल्लवशिरोमणिचोदी भोष्यडानन जगत्परिपाहि।।6।।
इति षण्मुखी.॥ नोट-6 mukhi rudraksha कार्तिकेय का स्वरूप है। इसे सदा दाहिने हाथ में धारण किया जाता है व इसे धारण करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। इसे निम्न मंत्र से धारण करना चाहिए

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