benifits of pearl stone मोती का उपयोग

मोती का उपयोग कैसे करें (Pearl stone)

मोती को भिन्न-भिन्न रूपों में प्रयोग किया जाता है। जो मोती रूप रंग में व आकार मे सुन्दर होते हैं उन्हें प्रायः आभूषणों में मढ़वाकर तथा केवल मोतियों का ही हार आदि विभिन्न प्रकार के आभूषणों के रूप में पहनते हैं। मोती का पाउडर भी शारीरिक सौन्दर्यता व कान्ति को बढ़ाने वाला होता है।
Pearl stone मोती के धारण करने से शारीरिक कान्ति, रूप, सौन्दर्य, बल, ज्ञान एवं बुद्धि की वृद्धि होता है। धन, यश, सम्मान एवं प्रभुत्व को दिलाने वाले एवं सभी प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति करता है, तथा स्त्री गुण में भी वृद्धि करता है तथा धार्मिक भावना का पुष्ट करता है।
टूटे-फूटे, टेढ़े-मेढ़े व अन्य दोषी मोतियों को औषधि रूप में प्रयोग करते हैं । माती  का औषधि रूप में अनेक रोगों पर प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण के लिए ये हृदय रोग, मानसिक रोग, रक्तचाप, मूर्छा-मृगी, उन्माद, मूत्रदाह, मूत्रकृच्छ, पथरी, अर्श, दन्त रोग,
मुख रोग, उदर विकार, पेट-दर्द, वात वेदना, गठिया, नेत्ररोग, मियादी ज्वर, शारीरिक दुर्बलता व दाह आदि विकारों को नष्ट करता है।
दक्षिण भारत में पुत्री की शादी में मोती का या मोती जड़ा कोई आभूषण अवश्य ही देते हैं। चीन के लोग मृतक के मुख में मोती रखकर दाह-संस्कार करते हैं। ऐसा उनका विश्वास है कि इस प्रकार दाह-संस्कार करने से मृतक स्वर्ग को प्राप्त होता है।
जापानी बौद्धों का विश्वास है कि मोती ईश्वर के द्वारा उत्पन्न किया हुआ है, अत: इसको पास रखने से ईश्वरीय शक्ति प्राप्त होती है।
अथर्व वेद के अनुसार मोती भस्म के सेवन से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मोती की चमक निखारना

Pearl stone मोती को निरन्तर अधिक दिन तक धारण करने से पसीना, धूल तथा पानी के भाव से आभाहीन हो जाता है। अत: उसमें पुन: चमक व निखार लाने के लिए निम्न विधि का उपयोग करना चाहिए।
(क) आभाहीन मोती को पालतू कबूतर को खिला देना चाहिए। 20 घंटे तक उसके पेट में मोती को रहने देते हैं, फिर उसको मारने के बाद निकाल लेते हैं, फिर उसे रुई या मलायम कपड़े से साफ कर लेते हैं तो उसमें चमक आ जाती है।
परन्तु इस विधि से मोती का भार हल्का हो जाता है। ओर ये किसी पक्षी का जान पहले ना किसी तकनीक के कारण किया जाता था अब बहुत सारे तकनीक ओर केमिकल बाजार मे उपलब्द हे उसी को इस्तमल करे |
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(ख) आभाहीन मोती को रीठे के पानी में धोने पर साफ-स्वच्छ व चमकदार हो जाता है।
(ग) एक बर्तन में थोड़ा चावल व पानी लेकर गर्म करते हैं। चावल को पतला माण्ड बनने पर उतार लेते हैं। इससे मोती को साफ करने पर साफ स्वच्छ आभायुक्त हो जाता है।
(घ) मोटी मूली में गड्ढा बनाकर उसमें मोती को शक्कर के साथ या बूरे के साथ भर दिया जाता है। कुछ काल उपरान्त मोती को निकाल देने पर स्वच्छ आभायुक्त हो जाता है। इस विधि से मोती को किसी प्रकार की हानि भी नहीं पहुंचती।
(ङ) आभाहीन मोती को हाइड्रोजन पराक्साइड व ईथर के द्वारा भी साफ करने से चमक आ जाती है। परन्तु इसमें साफ करते वक्त विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। अन्यथा मोती नष्ट हो सकता है।

मोती के उपरत्न

मोती(Pearl stone) के प्रभाव या बदले में निम्न रत्नों को धारण किया जा सकता है।
1. निमरू-यह उपरत्न मरी हुई मोती वाली सीप की पूंछ से प्राप्त होता है। इसे निमरू कहते हैं। यह आकार में छोटा व चांदी के समान स्वच्छ चमकदार होता है। वह मोती से कम प्रभावकारी होता है।
2. श्वेत पखराज-मोती के स्थान पर श्वेत पुखराज को ग्रहण किया जाता है। यह मोती की अपेक्षा कम मूल्यवान होता है।
3. शखजोड़-दक्षिणावर्त शंख कभी-कभी समुद्र से जोड़े रूप में जुडे हुए होते हैं। इसे भी मोती का उपरत्न माना गया है। इसे घर में रखकर विधिवत पूजन करते रहने से धन, धान्य, स्वास्थ्य यश आदि की वृद्धि होती है।
4. श्वेत पुखराज (चन्द्रमणि)-श्वेत पुखराज को ही चन्द्रमणि भी कहते हैं। क्योंकि इस पर ज्यों-ज्यों चन्द्रमा की किरणें पड़ती हैं, वैसे-वैसे इसमें आभा की वद्धि होती है। इसका दूसरा नाम पुष्पराज भी है। फारसी में सफेद याकूत तथा अंग्रेजी में टोपाज कहते हैं |
5. प्राप्ति स्थान-श्वेत पुखराज हिमालय, विन्ध्याचल, महानदी, पोरबन्दर, श्रीपर पूना, श्रीलंका तथा विश्व के अन्य स्थानों में पाया जाता है।
लाभ-श्वेत पुखराज धारण करना शान्ति, बल, वीर्य एवं नेत्र ज्योति वर्द्धक है।
Pearl stone

श्वेत पुखराज के उपरत्न

1. संग गौरी-यह सफेद रंग का चमकदार, मृदु व चिकना होता है। इस पर नीली या सफेद रंग की धारी या गेरुवे रंग का गौरीशंकर की मूर्ति के समान चिन्ह होता है। संग गौरी पत्थर से निर्मित पात्र में विष मिला भोजन रखने से पात्र चटक या टूट जाता है।
2. संग सफेद-यह श्वेत पुखराज की तरह चिकना, चमकीला, किसी भी प्रकार के धब्बों से रहित व आभायुक्त होता है, इसको अंगूठी में धारण करने से या भस्म को खाने से धातु विकार, नामर्दी, मूत्रदोष, मूत्रकृच्छ, रक्त विकार, नेत्रदाह व मानसिक असन्तुलन में लाभ होता है।
3. संग नीला-यह पत्थर सफेद रंग का होता है, इस पर नीले रंग की रेखा चारों ओर लिपटी रहती है, इसको अंगूठी में धारण करने से सर्प, बिच्छु आदि विषधर जन्तुओं का भय नहीं रहता।

असली व नकली मोती की पहचान

असली  मोती (Pearl stone)

1. धान की भूसी को कपडे में उससे मोती को रगड़ने से असली मोती में चमक आ जाती है।
2. स्वच्छ कांच के गिलास मे पानी भरकर उसमे मोती को डालने पर असली मोती से किरने निकलती दिखाई देती हे |
3. जमा हुआ घी असली मोती से पिघल जाता हे |
4. गोमत्र भरे हुए मिट्टी पात्र में रात भर मोती रहने से असली मोती नहीं टूटता है।
5. चावल में मोती को रगड़ने पर असली मोती में चमक आ जाती हे |
6. असली मोती की ऊपरी परत कोमल होती हे |
7. असली मोती में किया गया छिद्र  एक सामान होता हे |
8. असली या कल्चर मोती पर हइड्रोक्लोरिक अम्ल के प्रभाव से झाग उठने लगता है
नकली मोती (Pearl stone)

1. जबकि नकली मोती का चूर  हो जाता है।
2. जबकि नकली मोती से कोई किरण  निकलती नहीं दिखाई देती है।
3. नकली मोती से घी नहीं पिघलता। पिघल जाता है।
4. जबकि नकली मोती रात भर मे टूट जाता हे |
5. जबकि नकली मोती की चमक नष्ट हो जाती है।
6. जबकि नकली मोती को ऊपरी परत कठोर होती है।
7. नकली मोती में किया गया छिद्र मध्य मे चोडा होता हे |
8. जबकि नकली मोती पर हइड्रोक्लोरिक अम्ल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
तथा आधुनिक युग में अब नये-नये उपकरण भी असली मोती की पहचान के लिए बनाए गए हैं|
यह विश्व का एक सप्रसिद्ध व मूल्यवान रत्न हैं |

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