Diamond, hira stone, हीरा रत्न | benifits of Diamond stone

हीरा Diamond

पर्याय नाम-हीरक, वज्र, भार्गव प्रिया, मणिश्वर, पवि, अभेद्य, कुलिष, विद्यत अर्क, त्रिपुर।
हिन्दी-हीरा,
मराठी-छोटा हीनरा,
बंगाली-हीरक,
अरबी-अलमास,
अंग्रेजी-डायमण्ड। Diamond
परिचय- हीरा मात्र खनिज रत्नों में ही नहीं अपितु विश्व की सभी वस्तुओं में अपना सर्वश्रेष्ठ स्थान रखता है। हीरा अपने सर्वोपरि गुण कठोरतम होने के कारण, दुर्लभता, एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की सुगमता और अत्यधिक प्रचलन के कारण ही सभी रत्नों में श्रेष्ठ है।
हीरे वैसे तो अन्य रत्नों की तुलना में सबसे अधिक विश्वभर में लगभग 5 टन प्रतिवर्ष निकाले  होते हैं।  परन्तु ये प्राय: नीरस, धूमिल, कृष्ण व अपारदर्शक होते हे |शुद्ध हीरे अति ही अल्प (काम )मात्रा मे पाए जाते हैं |
काष्ठ पर यदि पन्ना व पुखराज को रखा जाए तो पन्ना स्वयं दहकने लगता है। पुखराज सूर्य की भांति चमकने लगता है। परन्तु यदि हीरा को काष्ठपर  रखा जाये तो उसमें स्वयं का तो कोई परिवर्तन नहीं होता है, परन्तु वह काष्ठ अधिक स्वेत, अत्यधिक मनोहर, रवेदार व विशुद्ध दिखाई देता है।
Diamond हीरा विद्युत का कुचालक  (Bedconductor)   यह सतह पर रगड़ने से धन आवेश उत्पन्न करता है। परन्तु हीरा ताप का सुचालक है। इसलिए यह स्पर्स मे सीतल प्रतीत होता हैं |
हीरा  जल (Burn )जाता है। आक्सीजन गैस से परिपूर्ण शीशे के बर्तन में हीरा रखकर उस पर आतिश शीशे द्वारा सूर्य की किरणे केन्द्रित करने पर जलने लगता हे|(इसे सर हम्फ्री डेवी ने  सन् 1816 में जलाकर सिद्ध किया था।)

Diamond
Diamond हीरे के भेद

हीरे का असली रंग श्वेत वर्ण ही होता है। फिर भी यह अनेक रंगों में पाया जाता है। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार हीरा के आठ भेद होते हैं जो निम्न हैं-

1. हंस पति हीरा-यह हीरा हंस व बगुले के पंख के समान तथा दूध व दही के समान श्वेत वर्ण का होता है। ब्रह्मा जी हंस पति हीरा को ही धारण करते हैं।

2. कमलापति हीरा-यह अनार तथा गुलाबी रंग के कमल के पुष्प के वर्ण का होता है, इसे लक्ष्मीपति भगवान विष्णु धारण करते हैं।
3. बसन्ती हीरा-यह हीरा गेंदा पुष्प, जद गुलदाउदी या पुखराज के रंग का होता है, इसे जगदीश्वर शिवजी स्वयं धारण करते हैं।
4. वज्रनील हीरा-यह हीरा असली पुष्प अथवा नीलकंठ पक्षी के रंग के समान नील वर्ण का होता है, इसे देवेन्द्र इन्द्र धारण करते हैं।
5. वनस्पति हीरा-यह हीरा जल या सिरस पत्र के रंग के समान होता है, इसे वरुण देव धारण करते हैं।
6. श्याम वज्र-यह कृष्ण वर्ण का होता है, इसे यमराज धारण करते हैं।
7. तेलिया हीरा-यह अत्यन्त चिकना, जर्मी तथा स्याही के रंग का होता है। इसे भी यमराज धारण करते हैं।
8. सनलोई हीरा-यह पीत, कष्ण तथा सुर्ख व भूरे रंग का होता है।

हीरे का जाति (वर्ण) भेद

पाचीन धर्म ग्रन्थों के आधार पर वर्णाश्रम व्यवस्था के अनुसार हीरा चार प्रल होता है।
1. ब्राह्मण

2. क्षत्रिय,

3. वैश्य,

4. शूद्र।

1. ब्राह्मण जाति का हीरा-श्वेत अथवा बिल्लौर की भांति आभायुक्त, स्निग्ध व चन्द्रमा की भांति मनोहर होता है। इसे ब्राह्मण को धारण करना उत्तम होता है।

2. क्षत्रिय जाति का हीरा-शावक-नयन की भांति या रक्त-पीत-श्वेत मिश्रित वर्ण का हो या श्वेत हीरे से लाल वर्ण की किरणें निकलती हों तो क्षत्रिय होता है। इसे क्षत्रिय को धारण करना उत्तम होता है।
3. वैश्य जाति का हीरा-वैश्य जाति का हीरा सान पर धार की गई तलवार अथवा आग में तप्त तलवार को तेल या पानी में बुझाने पर जैसी चमक आती है तथा पीताभ श्वेत वर्ण का होता है। इसे वैश्य जाति को पहनना उत्तम होता है।
4. शूद्र जाति का हीरा-कृष्ण आभायुक्त, श्वेत वर्ण का हीरा शूद्र वर्ण का होता है। इसे शूद्र जाति के लोगों को धारण करना उत्तम होता है।

लिंग भेद से हीरा

लिंग भेद से हीरा तीन प्रकार का होता है।

1 पुल्लिंग,
2. स्त्रीलिंग,
3. नपुंसकलिंग। (गरुण पुराण)

1. पुल्लिंग हीरा-अत्यधिक चमकदार व इन्द्र धनुष के समान आभायुक्त हाता है। पानी में डालने पर इस हीरे की चमक पानी के ऊपर तैरती है तथा यह अष्टकाणाम रेखाओं एव बिन्दुओं से रहित श्वेत वर्ण का होता है।

2. स्त्रीलिंग हीरा-यह अल्प गोलाकार, चपटा, आयताकार रेखा बिन्दुआ स युक्त तथा षटकोणीय होता है।

3.नपुंसक लिंग हीरा-यह वजन में भारी, गोलाकार व तीक्ष्ण किनारों से युक्त होता है।

भौतिक गुण

कठोरता 10, आपेक्षिक गुरुत्व  3.15 से 3:53 तक , वर्तनांक 2.417 से 2.465 तक लाल किरणों वाले हीरे में2.402 पीत: रंग के हीरे में 2.417, हरे रंग में 2.427 तथा बैगनी रंग के हीरे मे 2.465 |

रचनानुसार यह विशुद्ध रवेदार कोयला हे | इसके जलने से carbandioxide  गैस निकलती है।

उत्पत्ति स्थान

पहले भारत में आन्ध्र प्रदेश के गोलकुण्डा स्थान में स्थित खान से बहुत हीरा प्राप्त होता था |वहीं से ऐतिहासिक हीरा कोहिनूर प्राप्त हुआ था।
वर्तमान में हीरा बुन्देलखण्ड पन्ना नामक नगर (म.प्र.) तथा तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, गुजरात, विदेशों में बाजील, दक्षिण अफ्रीका में बेसल्टन, बल्टटफोंटीन, बैल्जियम, रोडेशिया. कांगो वोरणियों,अमेरिका, आस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स आदि स्थानों में पाया जाता है।
असली उत्कृष्ट हीरा की पहचान-जो हीरा हल्के रंग की नीलिमा लिए श्वेत वर्णका या नीली या लाल किरण नि:सारित करते हुए सफेद वर्ण का हो या काले बिन्दुओं से मुक्त हो, वह उत्कृष्ट होता है। साथ ही इसमें चिकनापन, सुन्दर चमक, अंधेरे में जुगनू की तरह चमकने वाला, सुन्दर, कठोर व अच्छे वर्णयुक्त हो वह श्रेष्ठ हीरा है।

हीरा के गुण

1. हीरा सबसे अधिक कठोर होता है जिससे किसी भी वस्तु से हीरे पर रगड़ या खरोंच का निशान या रगड़ने का भी निशान नहीं पड़ता।
2. हीरा बिजली का कुचालक होता है, अत: हाथ में हीरे की अंगूठी पहनने पर बिजली के झटके का प्रभाव नहीं पड़ता है।
3. बकरी  के ताजे दूध में रखने पर कछ समय उपरान्त हीरा टूक -टूक  हो जाता है।
4. हीरा की चमक स्थायी व ताप में शीतल होती है।
5. उन्नतोदर ताल द्वारा सर्य की किरणें एकत्रित कर हीरे पर डालने पर हीरा जलजाता है।
6. हीरे को अत्यधिक गर्म करने पर रंग  हल्का हो जाता है. परन्त शीतल होने पर रंग पुनः पूर्ववत् हो जाता है।
7. अंधकार में अच्छे हीरे के प्रकाश में पढ़ा जा सकता है।
8. हीरा कठोर होते हुए भी भंगुर है तथा हाथ से नीचे गिरने पर टूट जाता है।
9. प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हीरा पानी पर तैरता है, इसलिए इसका नाम वारितर भी रखा गया है।

हीरा के दोष

रक्त मुख वाला हीरा, पीत मुख वाला हीरा, धूमिल या धुएं के सदृश हीरा. गड्ढेदार हीरा, चमकहीन हीरा, रेखायुक्त हीरा, किसी भी रंग के छोटे-छोटे बिन्दुयुक्त हीरा, कटा हुआ या धारयुक्त हीरा तथा कौए के पंजे के समान चिन्हित हीरा दोषयुक्त होते हैं।
उपरोक्त दोषों से युक्त हीरा को धारण करने से धन-धान्य, वंश, बल, वीर्य, बुद्धि तथा पशु का नाश होता है। व्याधि बर्धक, चित्त की चंचलता व उदासीनता को बढ़ाता है तथा सभी प्रकार की हानि पहुंचाने वाला यहां तक कि मृत्यु कारक भी होता है।

नकली हीरा

अन्य रत्नों की भांति हीरा भी नकली बनाया जाता है। क्योंकि हीरा की अत्यधिक कीमत व सम्मान देखकर चार 420 लोग नकली हीरा बनाने का प्रयत्न करते हैं। यह कार्य आज के वर्तमान युग में ही नहीं अपितु अति प्राचीन काल से ही होता आया है।
उदाहरणार्थ
“अयसा पुष्परागेण तथा गोमेदकेन च।
वैदूर्य स्फटिकाभ्याश्च काचश्य पृथम्बिधैः
प्रतिरूपाणि कुर्वन्ति वज्रस्य कुशला जनाः।”
(गरुड़ पुराण अ. 68)
अर्थात लोहा, पुखराज, गोमेद, वैदूर्य, स्फटिक तथा कांच से चालाक लोग नकला हीरे भी बनाकर बेचते हैं। अत: हीरा खरीदते समय भली प्रकार परख कर खरीदना चाहिए।

असली हीरे की परख

1.असली हीरा Diamond को गर्म दूध, पानी, घी या तेल में डालने पर शीघ्र ठण्डा हो जाताहै तथा घी जमने लगता है।
2. सूर्य की धूप मे असली हीरे  से  इन्द्रधनुष के समान रंग निकलता है, तथा तुतलाकर बोलने वाले के  मुख में रख देने से तुतलाहट शीघ्र समाप्त हो जाती है।
3. असली हीरे पर  किसी अन्य  वस्तु की खरोंच या रगड का चिन्द, नहीं पड़ता है।
4. हीरे के पीछे अंगुली या कोई वस्तु रखकर देखने से दिखाई नहीं देता है, जबकि नकली में दिखाई देता है।
5. असली हीरे की चमक स्थायी होती है।
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नकली हीरे की पहचान

कांच निर्मित नकली हीरे Diamond के भीतर बुलबुले से चिन्ह होते हैं, असली में नहीं होते। नकली हीरा स्पर्श मे गरम व मृदु होता हे तथा यह किसी भी  सूक्ष्म धार युक्त रेती अथवा सान पर घिसने से सरलता से घिस जाता है।

असली की तुलना में हल्का होता है. इसकी पसीना, शरीर की गर्मी या अन्य कारणों से धूमिल पड़ जाती है, हरे रंग की कान्तियुक्त सभी हीरे नकली होते हैं।

हीरा का उपयोग

Diamond हीरा को शुक्र ग्रह के दोषों के शान्त्यार्थ धारण करते हैं, अपने शरीर की शोभा बढाने के लिए आभूषण के रूप में धारण करते हैं, तथा औषध रूप में मन्दाग्नि, वीर्यहीनता. वीर्य स्खलन, धातु दौर्बल्यता, सन्तानहीनता, दुर्बलता आदि में उपयोग करते हैं।

Diamond हीरा के उपरत्न

अन्य रत्नों की तरह हीरा के भी उपरत्न पाए जाते हैं। जो कि हीरे की अपेक्षा गुण व प्रभाव में अल्प होते हैं, जो व्यक्ति मूल्यवान हीरा नहीं खरीद सकते उन्हें इसके उपरत्नों को धारण करना चाहिए, ये निम्न हैं
1. दत्तला हीरा-यह चमकदार सवेतवर्ण का होता है, तथा यह बर्मा, हिमालय व श्याम में पाया जाता है।
2. तंकू हीरा-यह गलाबी रंग की आभा लिए श्वेत वर्ण का होता है, तथा यह कावेरी व गंगा के कछारों में पाया जाता है।
3. कसला हीरा-यह अधिक चिकना, कोणीय तथा पानीदार होता है तथा इसमें हर हरे रंग की आभा होती है। यह नेपाल के आसपास पाया जाता है।
4. कुरंगी हीरा-यह वजन में हल्का, कम चमकदार, पीली सी आभा लिए है, यह गंगा के कछार तथा हिमालय में पाया जाता है।
5. सिग्मा हीरा-यह सफेद वर्ण के काले धब्बों से युक्त पानीदार चमक युक्त होता है, यह अधिकतर हिमालय प्रदेश में पाया जाता है।

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