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परिचय Gems Stone

उपरत्नों की श्रेणी में जिन रतनिय पत्थरों को रखा गया है उनके नाम व संक्षिप्त परिचय निम्न प्रकार हैं –

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1. सुनहला

सुनहला सोने के रंग के समान सुनहरे रंग का पारदर्शी रत्न होता है। ज्योतिष की दृष्टि से इसे बृहस्पति ग्रह की शांति के लिए पुखराज का उपरत्ल माना गया है। इसके अंगूठी के नग तथा मालएं आदि भी बनती हैं।

2. कटैला

यह हल्के बैंगनी रंग का चमकदार तथा पारदर्शी रत्न होता है। इसे शनि ग्रह की शाति के लिए नीलम के उपरत्न के रूप में धारण किया जाता है। अगूठा के नगो  साथ-साथ इसकी मालाएं आदि भी बनाई जाती हैं।

3. रफटिक

सफेद बिल्लौर को स्फटिक भी कहा जाता है। यह सफेद चमकदार तथा पारदशा रतनीय पत्थर होता है। इसे शुक्र ग्रह का उपरत्न माना गया है। अगूठी  के नगो के अतिरिक्त  इसकी मालाएं, मूर्तियां तथा श्रीयंत्र आदि भी बनते हैं।

4. दाना फिरंग

यह हरे रंग का होता है तथा इस पर हल्के हरे रंग की लहरदार धारियां सी होती है गुर्दे के दर्द में इसे धारण करने से लाभ होता है। इसीलिए अंग्रेजी में इसे (किडनी स्टोर भी कहा जाता है।

5. फिरोजा

जैसा कि इसके नाम से ही प्रकट है यह फिरोजी रंग का होता है। साथ ही यह आसमानी रंग का भी होता है। यह अपारदर्शी उपरल होता है तथा बुध ग्रह की शांति के लिए धारण किया जाता है।

6. जबरजद

यह हरे रंग का आभायुक्त मुलायम पत्थर होता है। ज्योतिष की दृष्टि से इसे बुध ग्रह की शांति के लिए धारण किया जाता है।

7. तुरमली

यह कई रंगों में प्राप्त होता है। यह गुलाबी, हरे व नीले रंग में भी मिलता है। इसके रंगों के आधार पर ही इसे विभिन्न ग्रहों की शांति के लिए धारण किया जाता है।

8. ओपल

ओपल प्राय: सफेद रंग का होता है तथा इसकी सतह पर कई रंगों के छीटे-से होते हैं। यह काफी नर्भ उपरत्न होता है-जरा-सी चोट से ही टूट जाता है। इसे हीरे का उपरत्न माना गया है।

9. संगसितारा

यह गहरे गेरुए-से रंग का अपारदर्शी रत्नीय पत्थर होता है तथा इसकी सतह पर सूनहरे रंग के छीटे-से पड़े होते हैं। इसके अंगूठी के नग, दर्शन-जोडी तथा मालाए आद बनती हैं।

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10. जिरकॉन

जिरकॉन को अमेरिकन डायमंड भी कहते हैं। यह प्राय: सफेद रंग का होता है किन्तु इसके अतिरिक्त यह लाल, पीले, आदि रंगों का भी होता है। देखने में यह हीरे जैसा ही प्रतीत  होता है। यह प्रायः आभूषणों में जड़नेके काम में आता है।

11. माहे मरियम

gem stone

 

यह मटमैले रंग का सा होता है तथा इस पर पीले रंग की आड़ी-तिरछी लकीरों का जाल -सा होता है। यह बवासीर की बीमारी में लाभदायक माना जाता है।

12. लाजवर्त

इसका रंग नीला होता है और इसकी सतह पर सफेद रंग के धब्बे से होते हैं। शनि ग्रह की शांति के लिए इसे एक महत्वपूर्ण उपरत्न माना गया है। अंगूठी के नगों के अतिरिक्त इसकी मालाएं तथा लॉकेट आदि भी बनते हैं।

13. तामड़ा

यद्यपि इसका हिन्दी नाम तामड़ा तथापि आम बोलचाल की भाषा में इसका अंग्रेजी नाम ‘गारनेट’ ही अधिक प्रचलित है। यह गहरे लाल रंग का कुछ कालापन लिये हुए होता है। इसे माणिक का उपरत्न माना गया है। अंगूठी के नगों के अतिरिक्त इसकी मालाएं भी बनती हैं।

14. चन्द्रकांत मणि

चन्द्रकात मणि को गोदन्ती भी कहा जाता है किन्तु हिन्दी में इन दोनों नामों की अपना इसका अग्रेजी नाम ‘मून  स्टोन’ ही अधिक प्रचलित है। इसे मेती का उपरत्न माना गया है।

15. गन मैटल

यह काले रंग का चमकदार उपरत्न होता है। इसे शनि ग्रह का उपरत्न माना गया है।

16. मकनातीस

इसे मैगनेट स्टोर तथा चुम्बक पत्थर भी कहते हैं। यह काले रंग का चमकदार पत्थर होता है इसका विशेष गुण यह होता है कि यह लोहे को अपनी ओर खींचता है। ब्लड प्रेशर के रोग के लिए यह लाभदायक माना गया है।

17. काला स्टार

यह काले रंग का पत्थर होता है तथा इसकी सतह पर चमकीला स्टार-सा दिखाई देता है। इसे शनि का उपरत्न माना गया है।

18 टाइगर

इसकी सतह पर पीली तथा काली चमकीली पट्टियां-सी होती हैं। जिस तरह शेर की खाल पर पीले रंग पर काली धारियां होती हैं, उसी तरह इसका स्वरूप भी होता है। इसीलिए इसे टाइगरस्टोर कहा जाता है। ज्योतिष की दृष्टि से यह केतु तथा बृहस्पति का उपरत्न माना गया है। अंगूठी के नगों के अतिरिक्त इसकी मालाए आदि भी बनती हैं।

19. मरगज

मरगज नीले तथा हरे रंग का होता है। इसे बुध और शनि का उपरत्न माना जाता है।

20. ओनेक्स

यह हरे तथा नीले रंग का उपरत्न होता है। इसे बुध तथा शनि का उपरत्न माना गयाहै।

21. हकीक

यह प्रायः कई रंगों में पाया जाता है। इसकी सतह पर धारियां-सी होती हैं। इसके विभिन्न रंगों के कारण ही इसे विभिन्न राशिवालों को धारण कराया जाता है।

22. सुलेमानी

यह उपरत्न काले रंग का होता है तथा उस पर सफेद रंग की धारियां पड़ी होती हैं।

23. हकीक यमनी

इसे लाल ओनेक्स भी कहा जाता है। यह सुर्ख लाल रंग का उपरत्न होता है। मंगल ग्रह की शांति के लिए इसे अच्छा उपरत्न माना गयाहै।

24. बैरूज

इसका रंग हल्का हरा होता है। इसे पन्ने का उपरत्न माना गया है।

25. धुनैला

यह उपरत्न धएं के रंग और सनहरे रंग के मिश्रित रंग का होता है।

26. सजरी सीजरो

यह हकीक की जाति का उपरत्न है। यह भी हकीक के समान कई रंगों का होता है तथा प्राकृतिक रूप से इस पर फूल तथा पत्तियों के से आकार बने रहते हैं।

27. होलदिली

यह हरे तथा सफेद मिश्रित रंग का उपरत्न होता है। इसके विषय में कहा जाता है कि इसे धारण करने से दिल मजबूत रहता है तथा भय नहीं लगता ।

28. ऐलेग्जैण्ड्राइट

यह उपरत्न नीले तथा जामुनी-से रंग का होता है।

29. लालड़ी

इसका रंग गुलाब के फूल के समान गुलाबी आभायुक्त होता है।

30. रोमनी

यह गहरे लाल रंग का कुछ कालापन लिए होता है।

31. नरम

यह लाल रंग के साथ कुछ पीलापन लिए हुए होता है।

32. लूधिया

यह मजीठ के समान लाल रंग का होता है।

33. सिंदूरिया

यह गुलाबी रंग में कुछ सफेदी लिए हुए होता है।

34. नीली

इसे काका नीली भी कहते हैं। यह नीलम की जाति का उपरत्न होता है। इसका रंग नीला होता है। इसे नीलम का उपरत्न माना गया हैं

35. पितौनिया

इसका रंग हरा होता है और इस पर लाल रंग के छीटे-से होते हैं।

36. बांसी

यह हल्के हरे रंग का नरम पत्थर होता हैं

37. दुर्वेनजफ

कच्चे धान के रंग का होता है।

38. आलेमासी

यह सुलेमानी की जाति का उपरत्ल होता है। इसका रंग भूरा होता है तथा इस पर काली धारियां होती हैं।

39. जजेमानी

यह भूरे रंग का पत्थर होता है तथा इस पर क्रीम रंग की धारियां होती हैं।

40. सावोर

इसका रंग हरा होता है तथा इस पर भूरे रंग का डोरा होता है।

41. तुरसवा

इसका रंग गुलाबी में कुछ पीलापन मिश्रित होता है।

42. अहवा

इसका रंग गुलाबी होता है तथा इसकी सतह पर बड़े-बड़े छींटे होते हैं।

43. शाबरी

इसका रंग काला होता है।

44. कुदरत 

यह काले रंग का होता है तथा इस पर सफेद और पीले दाग होते हैं।

45. चित्ती

इसका रंग काला होता है तथा इस पर सुनहरी धारियां होती हैं।

46.संग सन

इसका रंग सफेद तथा अंगूरी रंग मिश्रित होता है।

47. लारु

यह मकराने की जाति का पत्थर होता है।

48. मारवर

इस मारवल तथा संगमरमर भी कहते हैं। यह विभिन्न रंगों का होता है।

49. कसौटी

यह स्याह काले रंग का पत्थर होता है। इस पर घिसकर सोने-चांदी की परीक्षा की

50. दारचना

यह कत्थई रंग का होता है तथा इस पर पीले रंग के छींटे होते हैं।

51. हकीक गलबहार

इसका रंग कुछ पीलापन लिए हुए हरा होता है। इसे माला बनाने के काम में लाया जाता हे |

52. हालन

इसका रंग गुलाबी होता है। इसे हिलाने पर इसका रंग भी हिलता हुआ-सा प्रतीत होता है।

53. मुबनजंफ

यह पत्थर सफेद रंग का होता है तथा इस पर काली धारियां होती हैं।

54.कहरुआ

इसका रंग लाल होता है। इसकी माला बनाई जाती है।

55. झना

यह मटियाले रंग का होता है।

56. संगबसरी

आंखों का सुरमा बनाने के काम आता है।

57. दांतला

यह चिकना, पानीदार, सफेद तथा हरे रंग का होता है।

58. मकड़ा

यह हल्के काले रंग का होता है तथा इसकी सतह पर मकड़ी का जाला सा बना रहता है।

59. संगिया

यह सेलखड़ी से मिलता-जुलता सफेद रंग का होता है।

60. गुदड़ी

यह पीले रंग का होता है।

61. सिफरी

इसका  रंग नीले तथा हरे रंग के मिश्रित रंग का होता है।

62. कामला

इसका रंग सफेदी लिए हुए हरा होता है।

63. हरीद

यह काले तथा कुछ भूरापन लिए हुए रंग का होता है।

64. हवास

यह हरे रंग का कुछ सुनहला-सा होता है।

65. सींगली

यह माणिक की जाति का उपरत्न होता है। इसका रंग लाल में कुछ कालापन लिए हुए होता है।

66. ढेड़ी

इसका रंग काला होता है। इसे खरल बनाने के काम में लाया जाता है।

67. गौरी

यह  हकीक से मिलता-जुलता धारीदार तथा कठोर पत्थर होता है। यह प्रायः कई रंगों में उपलब्ध होता है।

68. सीया

इसका रंग काला होता है। यह मूर्तियां बनाने के काम आता है।

69. सीमाक

यह लाल रंग का कुछ पीलापन लिए हुए होता है। इस पर गुलाबी रंग के छींटे होते हैं।

70. मूसा

यह सफेद तथा मटियाले रंग का होता है। इसके प्याले तथा खरल आदि बनते हैं।

71. पनघन

इसका रंग काले में कुछ हरापन लिए हुए होता है।

72. अमलीया

यह हल्का कालापन लिए गुलाबी रंग का होता है।

73. डूर

यह कत्थई रंग का पत्थर होता है।

74. लिलियर

इसका रंग काला होता है तथा इस पर सफेद रंग के छींटे होते हैं।

75. खारा

यह कुछ हरापन लिए हुए काले रंग का होता है।

76. पारा जहर

यह सफेद रंग का होता है।

77. सेलखड़ी

सफेद रंग का नर्म तथा चिकना पत्थर होता है। इसे क्रीम, पाउडर, आदि बनाने के काम में लाया जाता है।

78. जहरमोहरा

इसका रंग कुछ सफेदी लिए हुए हरा और काला-सा होता है। यह सांप का विष उतारने के काम में आता है।

79. रवात

यह लाल तथा नीले दो रंगों में पाया जाता है। इसे रात-रतुआ भी कहते हैं। यह रात में आने वाले ज्वर में लाभदायक माना जाता है।

80. सोनमक्खी

यह सफेद मिट्टी के रंग का-सा होता है।

81. हजरते-ऊद

यह काले रंग का पत्थर होता है।

82. सुरमा

यह काले  रंग का पत्थर होता है। इससे आंख का सुरमा बनाया जाता है।

83. पारस

इसके विषय में कहा जाता है कि इसके स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है किन्तु यह सर्वथा  दुर्लभ  वस्तु है। इसके विषय में प्राय: दंत कथाएं ही सुनने को मिलती है।

84. रेनबो

यह सफेद रंग का चमकदार उपरत्न होता है तथा धूप में इसे देखने से  इसमे कई रंगों की  झलक प्रतीत होती है।
इस प्रकार रत्न-उपरत्नों के उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि उसमे अनेकों एसे  उपरत्न भी शामिल हैं जिनका उपयोग न तो आभूषणों में किया जाता है और न ही ज्योतिष की दृष्टि से उनका कुछ महत्व और उपयोग है।

बल्कि उनका उपयोग अनेक प्रकार के उद्योगों जैसे मूर्तियां तथा खरल आदि बनाने, औषधियों तथा भवन निर्माण आदि में किया जाता है किन्तु क्योंकि इन्हें भी उपरत्नों की श्रेणी में शास्त्रकारों ने गिनाया है, इसलिए यहां । इनका उल्लेख किया गया है।

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