Gomed, Gomed stone, गोमेद रत्न | benifits of Gomed stone

गोमेद

पर्याय नाम-संस्कृत-स्वर भानु, पीत रत्न, राहु रत्न, गोमेद, गोमेदक, ऋणवर, तापोमणि, पिग, स्फटिक आदि।
हिन्दी-गोमेद, गोमेद मणि Gomed stone
बंगला-लोहित मणि।
अरबी-हजारयमनी।
English –जिरकन ।

परिचय

सुस्वच्छ गोजलच्छार्य स्वच्छ स्निग्ध समगुरु।
निर्रल मसृणं दीप्त गोमेद शुभभष्टचा।।
विच्छायं लघु रुलांग चिपिट पटलान्वितम्।
निष्प्रभं पीतकाचात्रं गोमेदं न शुभावह्म।।
जो गोमेद दूर से ही स्वच्छ गोमूत्र के समान स्वच्छ दीखता हो, पारदर्शी हो, स्निग्य दो समगात्र हो अर्थात् गोमेद के सतह विषम तल वाले न हों, वजनदार व दड़कदार हो, जिसमें कोई परत न हो, स्पर्श में कोमल तथा देखने में चमकदार हो व गोमेद बढ़िया कहलाता हैं |

उत्पत्ति स्थान

भारत  में-उत्तरी भारत के पर्वतीय क्षेत्र में, बिहार व दक्षिण भारत में।
दक्षिण एशिया में-हिन्द चीन,श्याम, बर्मा, न्यूजीलैण्ड व लंका तथा कवीशसलैण्ड(आस्ट्रेलिया) व थायलैंड मे भी  विशेष रूप से पाया जाता है। लंका से प्राप्त गोमेद श्रेष्ठ होता हे |
यहा का रंगहीन गोमेद मैतुरा हीरा के नाम से सिद्ध है क्योंकि इसे देखकर पहले हीरा होने का ही  सन्देह हो गया था। बाद में निर्णय हो सका कि वास्तव में यह हीरा नहीं गोमेद है। गोमेद सायनाइट नामक पत्थरो की चट्टानों में बहुतायत रूप में पाया जाता है।

भौतिक गुण

कठोरता 7.5 तक, आ. घ. 4.65 से 4.71, पारदर्शक, पारभासक तथा अपारदर्शक, हीरे के समान द्युति वर्तनांक 1.93-1.98 दुहरावर्तन 0.06 अपकिरणन 0.048 ।

gomed stone

गोमेद के भेद

Gomed stone गोमेद का रंग गोमूत्र के समान पीतवर्ण का कुछ रक्ताभ तथा श्यामवर्ण युक्त होता है। किसी-किसी में शहद  के रंग की आभा झलकती है। अत: यह तीन वर्गों में विभाजित

  1. उच्चवर्गीय गोमेद-इसका रवा चतुष्कोणीय होता है, इसकी द्विवर्णिता नंगी आंखों से सरलतापूर्वक स्पष्ट देखी जाती है। इसमें दो रंग-नीला व श्वेत रंग दिखाई देता है। इसे सरलता से नहीं चीरा जा सकता है।

       2. मध्यवर्गीय गोमेद-यह गहरे लाल रंग का तथा भूरापन लिए लाल रंग का  होता है, गर्म करने पर दड़क व वर्तनांक में परिवर्तन होकर उच्चवर्ग का गोमेद बन जाता है।

  1. निम्नवर्गीय गोमेद-यह हरे रंग का झाई युक्त होता है, तथा भूरे व नारंगी रंग के भी गोमेद पाए जाते हैं। इसमें द्विवर्णिता बहुत कम पाई जाती है।

गोमेद रत्न सामान्यतः भिन्न-भिन्न रंगों में पाया जाता है, अत: रंग भेद से इनके नाम भा भिन्नता है। लाल रंग, लाल झाई से युक्त व भूरे रंग वाले गोमेद को अंग्रेजी में जैसिंथ  तथा पीताभ व पीत वर्ण के गोमेद को जार्गुण  कहा जाता है।

श्रेष्ठ गोमेद के लक्षण

गाय की चरबी के रंग के हल्के पीले वर्ण के गोमूत्र के जैसी आभायुक्त स्वचछ, समडोल, भारी, मृदु , प्रकाशवान, चिकना तथा दलरहित अर्थात् जिसमें परत न हो ,ये  उच्चकोटि के गोमेद कहे जाते हैं।

1.Sapphire, नीलम रत्न | benifits of Sapphire stone
2.Diamond, hira stone, हीरा रत्न | benifits of Diamond stone
3.spinel, spinel red, लालड़ी रत्न | benifits of spinel red

गोमेद रत्न के दोष

अन्य रत्नों की भांति गोमेद भी दोषयुक्त पाये जाते हैं। अत: दोषयुक्त गोमेद रत को धारण नहीं करना चाहिए। इसके दोष निम्न होते हैं
1. रुक्ष-गोमेद समाज में मान प्रतिष्ठा की हानि पहुंचाता है।
2. रक्तिम-लाल मुख वाला या लाल रंग वाला गोमेद शरीर में चकत्ते जैसा रोग पैदा करता है।
3. सुन-चमक से रहित गोमेद स्त्री के लिए कष्टदायक होता है।
4. अबरी-कई रंगों से युक्त गोमेद धन का नाश करता है।
5. गड्ढा-गड्ढादार गोमेद धन हानि करता है।
6. धब्बा-धब्बेदार गोमेद घर व देश से विदा करने वाला होता है।
7. श्यामल-काले रंग का गोमेद सन्तान व बन्धु-बान्धव को हानि पहुंचाता है।
8. छींटेदार-लाल व काले रंग के छींटे से युक्त गोमेद किसी तेज वाहन द्वारा अपघात करता है।
9. चीरे वाला-चीरे वाला या क्रॉस वाला गोमेद समाज में विरोध व रक्तविकार उत्पन्न करता है।
10. श्वेत बिन्दु युक्त-श्वेत बिन्दु से युक्त गोमेद मन एवं शारीरिक कष्ट उत्पन्न करता है।

11. बहुदोषी-अनेक दोषों से युक्त गोमेद स्त्री सुख को नष्ट करता है।

(Gomed stone)गोमेद के उपयोग

यह राहु  के दोषों को नष्ट करने के लिए धारण किया जाता है. तथा चिकित्सा दृष्टिकोण से दुर्गन्ध, गर्मी, नकसीर, वायु गोला, ज्वर, तिल्ली, प्लीहा, बवासीर, पाण्डु’ त्वचा रोग आदि अन्य रोगों में प्रयोग करते हैं।

सामान्यतया गोमेद धारण करने से धन-सम्पत्ति सुख एवं सन्तान की वृद्धि अनेकों व्याधियों का नाश तथा शत्रु भय का नाश होता है।

असली गोमेद की पहचान

1. असली Gomed stone 24 घण्टे तक गोमूत्र में पड़े रहने पर गोमेद का रंग बदल जाता हे नकली में नहीं।

2. असली गोमेस  को लकड़ी के बुरादे में घिसने पर उसमें चमक की वृद्धि होती है, नकली में नहीं।

3. असली गोमेद का रंग  बाज पक्षी या उल्लू पक्षी की आंख के समान होता है।

4. असली गोमेद को दूध भरे  बर्तन में रखने पर दूध गोमूत्र के रंग का हो जाता है, नकली से नहीं।

5. असली गोमएफ को  कसौटी पर घिसने से उनकी कान्ति यथावत बनी रहती है, नकली से नहीं।

गोमेद रत्न के उपरत्न

(Gomed stone)गोमेद के उपरत्न भी दो प्रकार के होते हैं। जो निम्न हैं

1.संग साफी-यह रूखा, भारी, मटमैला तथा चिकना होता है। यह हिमालय, विन्ध्याचल के क्षेत्र में तथा तुर्कीस्तान में पाया जाता है।

2. संग तुरसावा-यह पीला, लाल, काला, तथा हरे रंग का चिकना, स्वच्छ हल्का व चमकीला होता है, किसी-किसी में हरी झाई तथा मलिनता भी पाई जाती है। यह ईरान, अरब, मदीना एवं हिमालय की नदियों में पाया जाता है।

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