Coral,munga stone धारण करने की विधि | benifits

प्रवाल (मूंगा रत्न)

 पर्याय नाम-संस्कृत – विद्रुम, प्रवाल, लतामणि, रक्तांक, अंगारक मणि, अम्भोधि पल्लव भौम रत्न।

हिन्दी व पंजाबी- मूंगा।

अंग्रेजी-कोरल (Coral )।

परिचय-प्रवाल अर्थात् मूंगा भी मोती रत्न की ही तरह प्राणीज रत्न है। मूंगा मख्य रूप से लाल रंग का होता है। इसके अतिरिक्त मूंगा गुलाबी, सफेद, काले पाण्डुर, भरे, धूसर तथा दो रंगी आभा वाले भी पाए जाते हैं।

मूंगा समुद्र तल में 600-700 फुट नीचे गहरी चट्टानों पर एक विशेष प्रकार के कीट जो रीढ़ रहित होते हैं, जिन्हें आइसिस नोबाइल्स कहा जाता है। इसके द्वारा बेलों के रूप में तैयार किया जाता है। जिस प्रकार दीमक कीट मिट्टी का अपना घर बनाते हैं, उसी प्रकार ये कीट भी अपना घर बनाते हैं।
उन्हीं घरों को मूंगे की बेल अथवा मूंगे की पौध कहते हैं। ये मूंगे के पौधे बिना पत्ती के शाखायुक्त होते हैं। मूंगे की पौधे जितने ही गहरे पानी में होते हैं, उतने ही ये कम गहरे रंग के होते हैं।

परिपक्व मूंगे की पौध को समुद्र से बाहर निकालकर मशीनों द्वारा उपयुक्त दानों के रूप में काट लेते हैं।

मंगा रत्न की उत्पत्ति स्थान

मूगा भूमध्य सागर के तटवर्ती  देश अल्जीरिया, अफ्रीका के ट्यूनिशिया तथा सिसली के  कोरल सागर में इटली तथा आस्टेलिया के समद्रों में ईरान की खाडी, हिन्द महासागर , सर्जिनिया , मासेलीज. कोर्सिका. स्पेन आदि स्थानों में पाया जाता है।

भौतिक गुण

यह कैलशियम काबोनेट का घटक है।
आपेक्षित गुरुत्व 2.65, कठोरता 1.658 दहरावर्तन, हाइडोक्लोरिक एसिड के डालने पर झाग उठता है।

प्रवाल के जाति भेद

वर्ण भेद के अनुसार प्रवाल की चार जातियां निम्न होती है –

1. ब्राह्मण मूंगा-इसका रंग अनार पुष्प के सदृश, रुद्र व कठोर होता हे |इसमे सरलता से छिद्र किया जा सकता है।

2. क्षत्रिय मगा-इसका रंग अनार पुष्प क सदृश, रुक्ष व सरलता से छिद्र नहीं हो पाता।

3. वैश्य मंगा-इसका रंग पलास पुष्प के समान होता है। स्पर्श मे मृदु तथा कम चमकदार होता है।

4. शूद्र मंगा-यह कान्ति रहित तथा रंग में लाल कमल दल के समान होता है इसमें छिद्र नहीं हो पाता।

प्रवाल के दोष

munga stone

 

दोष युक्त प्रवाल भूलकर भी धारण नहीं करना चाहिए, अन्यथा इससे लाभ के बदले हानि भी होती है। अत: निम्न दोषों से युक्त मूंगा को धारण नहीं करना चाहिए।

छिद्र युक्त मूंगा, घुना हुआ मूंगा, गड्ढेदार मूंगा, दो रंगों वाला मूंगा, काला धब्बा युक्त मूंगा, चीरदार मूंगा, दो रंगों वाला मूंगा, सफेद दाग युक्त

मूंगा व लाख के रंग का मूंगा कभी भी धारण नहीं करना चाहिए तथा टेढ़ा, पतला, खांचेदार, रूखा, काला, हल्का सफेद, चूनायुक्त, कषाय वर्ण

या धूसर वर्ण के मूंगों को भी धारण नहीं करना चाहिए। इन दोषों से युक्त मूंगों के धारण करने से शारीरिक कष्ट, आधा शीशी,शरीर में दर्द, कष्टकर, बुद्धिहारक तथा सम्पत्ति आदि के द्वारा कष्ट पहुंचाता है। ‘

प्रवाल के गुण

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श्रेष्ठतम मूंगा गोल, लम्बा, सीधा,चिकना, विषमतल व गड्ढों से रहित, चमकदार, पके हुए बिम्बी फल के समान, कोणदार, प्राय: करके त्रिकोणात्मक, औसत वजन से कुछ भारी होता है।

Munga stone

असली नकली मूंगे की पहचान

अन्य रत्नों की ही तरह मूंगे भी नकली बनाए जाते हैं। ये कांच के बने होते हैं |

अत: असली मूंगे की निम्न पहचान है-

(क) असली मूंगा को रक्त में रखने पर उसके चारो तरफ रक्त जम जाता है, नकली में नहीं।

(ख) दूध में मूंगा डालने पर असली होने से दूध में लाल रंग की आभा दिखाई देती है।

(ग) ब्राह्मण जाति के मूंगे को सूर्य की धूप में रूई पर रख देने से एक-दो घंटे में रुई में आग लग जाती है।

(घ) आई ग्लास से नकली मूंगे में महीन तथा छोटे रवे दिखाई देते हैं, जबकि असली में नहीं।

(ङ) नकली मूंगे को घिसने पर शीशे की तरह आवाज आती है, जबकि असली मूंगे के घिसने से नहीं आती है।

(च) असली मूंगा नकली मूंगे की अपेक्षा वजन में हल्का होता है।

मूंगे का उपयोग

मूंगे के दानों की मालाएं तथा अंगूठी भी बनाई जाती है। चिकित्सा में इसकी भस्म व पिष्टी का उपयोग करते हैं। विशेष मूंगा का प्रयोग मंगलग्रह

के दोष की शान्ति के लिए तथा हृदयरोग, मृगी, नजरदोष, भूत-प्रेत, चुडैल, आंधी, तूफान, बिजली, छाया, माया, स्वपन आदि के प्रभाव को नष्ट करने के लिए करते हैं।

प्रवाल के उपरत्न

 

Munga stone का उपरत्न संगमूंगी है। मूंगे के पौधे के मूल में जो पतली शाखाएं निकलती हैं उन्हें ‘संगमूंगी’ या ‘विदममूल’ कहते हैं। यह छिद्र युक्त लाल रंग का होता है। यह भी उसी रंग का होता है जिस का मूंगे का पौधा होता है। इसका प्रभाव भी लगभग मूंगे की ही भांति है।

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