रुद्राक्ष की असली नकली की पहचान | rudraksha ki pahchan

Rudraksha ki pahchan

रुद्राक्ष के रंग

(क) प्रथम प्रकार के रुद्राक्ष गहरे चाकलेट रंग गहरे कत्थई रंग अथवा छुआरत भी गहरे दिखाई पड़ने वाले होते हैं। गहरा गुलाबी रंग भी होता है।
(ख) द्वितीय श्रेणी का रुद्राक्ष चाकलेट रंग मध्यम कत्थई और बादाम का जैसे रंग का होता है। मटियाला-सा रंग भी पाया जाता है।
(ग) तीसरी श्रेणी का रुद्राक्ष कुछ सफेदी लिए हुए, कत्थई अ सयम पाय जान वाला रुद्राक्ष अधिकांश दो मखी रुद्राक्ष होता हे ।

रुद्राक्ष की असली नकली की पहचान

अधिकतर रुद्राक्ष असली होते हैं। नकली रुद्राक्ष वे ही बनाये जाते हैं जो आसानी से नहीं मिलती हैं। दो मुखी से लेकर पांच मखी तक के रुद्राक्ष तो सर्व सुलभ हैं इसलिए इनमे नकली का प्रसन नहीं हे । केवल किस्म व आकार के अंतर से मूल्य में थोड़ा बहुत फर्क होता ।
ये जाते हैं जो आसानी वसुलभ

इनमें नकली का प्रश्न नहीं है। केवल किस्म व आकार के अन्तर से मूल्य में थोड़ा बहुत फर्क होता है।

पहली पहचान

रुद्राक्ष कितने ही मुख का हो या किसी भी आकार का हो यदि वह पूर्ण पका हुआ सही रुद्राक्ष है तो पानी में डालने से डूब जायेगा। पानी में डूब जाने वाले दाने को उत्तम प्रकार का रुद्राक्ष मानना चाहिए। जो रुद्राक्ष तैरता है, उसके लिए ये आवश्यक नहीं कि वह लकड़ी का बना है या नकली है लेकिन ये बात निश्चित रूप से कही जाएगी कि वह डूबने वाले रुद्राक्ष से निम्न श्रेणी का है।

दूसरी पहचान

दो ताम्बे के सिक्कों के बीच रुद्राक्ष को रखकर यदि दबाया जाए तो वह एक झटके के साथ दिशा बदल कर घूम जाता है। इसके अतिरिक्त यदि दो ताम्बे के भारी पात्रों के मध्य रुद्राक्ष रखने से वह हिलने लगे तो समझ लो कि रुद्राक्ष असली है।

अत: रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व ये जांच अवश्य करें कि वह बिल्कुल ठीक है या नहीं। जो रुद्राक्ष कीड़े के खाए हों उन्हें धारण न करें। जो रुद्राक्ष खण्डित (टूटा हुआ) हो उसे भी नहीं पहनना चाहिए। सूक्ष्मदर्शी शीशे की सहायता से विखण्डित रुद्राक्ष आसानी से पता लगाया जा सकता है। जो रुद्राक्ष छिद्र करते समय फट जाएं वह भी प्रभावहीन होते हैं उन्हें धारण नहीं करना चाहिए।

रुद्राक्ष को पहनने से पूर्व लगभग एक सप्ताह तक उसे शुद्ध सरसों के तेल में ड्बा दें। जब आप उसे तेल में से निकालेंगे तो उसका रंग पहले से गहरा प्रतीत होगा। इसके बाद रुद्राक्ष को साफ कागज या रुई पर रख दें जिससे उसका अतिरिक्त तेल साफ हो जाए। फिर शुद्ध जल से या गंगाजल से धोकर विधि के अनुसार धारण करें।

रुद्राक्ष की माला कैसे बनायें?

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रुद्राक्ष चाहे कितने ही मुख वाला हो, सामर्थ्यनुसार सोने अथवा चांदी की छतरी से जुड़वाकर स्वर्णकार से उसका सुन्दर-सा आकार बनवा लें। रुद्राक्ष के दानों के दोनों ओर शुद्ध मूंगे के मनके भी पहने जाते हैं। सबसे सस्ता और सरल तरीका ये है कि सूती धागा बटकर उसे मजबूत बना लें और उसमें पिरोकर रुद्राक्ष पहनें।

कुछ लोग लाल-नीले रंगों के धागों से पिरोकर माला पहनते हैं लेकिन ये राशि के अनुसार रंग धारण करना होता है। सफेद व पीला रंग सभी के लिए कल्याण देने वाला है। चादी अथवा सोने की जंजीर में लाकेट बनाकर भी रुद्राक्ष पहना जाता है। एक मुखी रुद्राक्ष प्लेटोनम या पंचधातु को जंजीर में पिरोकर पहनना सर्वोत्तम है।

1.एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि संस्कृत श्लोकों, मन्त्रों द्वारा
2.रुद्राक्ष के प्रकार और लाभ

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रुद्राक्ष पहनने वाले इस बात का विशेष ध्यान रखें कि रुद्राक्ष का दाना गले में इतना नीचा हो कि छाती को स्पर्श करता रहे। इसके विशेष लाभ हैं। हृदय को स्पश करन बाल रुद्राक्ष हृदय रोग, हृदय कम्पन शल।ब्लडप्रेसर, हृदय धडकना आदि मावशष प्रभावकारा रहते हैं। रुद्राक्ष को विधिपूर्वक धारण करने वाले को भूत-प्रेत  बाधा  नहीं होती ।

रुद्राक्ष खरीदते समय विशेष सावधानियां

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रुद्राक्ष आध्यात्मिक दृष्टि से जितना मूल्यवान है, उतना भौतिक दृष्टिकोण से नहीं। फिर भी रुद्राक्ष खरीदते समय जो सामान्य जानकारी ग्राहक को होनी चाहिए उसकी चर्चा भी आवश्यक है।

रुद्राक्ष खरीदते समय जब दुकानदार 8/- रु। से लेकर 400/- रु। तक की माला ग्राहक के सामने रखता है तो निश्चित ही खरीददार के मन में ये बात आती है कि सस्ती वाला माला बेकार है और महंगी वाली ही असली होगी।

चार सौ रुपये वाली माला ही प्रभावशाली होगी और सस्ती वाली नहीं। लेकिन रुद्राक्ष की मालाओं का मूल्य उसके छोटे तथा बड़े आकार के दानों पर निर्भर करता है।

आजकल जो मध्यम आकार के रुद्राक्ष की माला जो सबसे सस्ती मिलती है उस रुद्राक्ष के दाने के आकार से रुद्राक्ष जितना छोटा होता जायेगा उसी अनुपात से उसका मूल्य बढ़ता जाता है। काली मिर्च के दाने के बराबर की माला यदि 400/- रु। में मिलती है तो बड़े आंवले के समान रुद्राक्ष के दानों की माला का मूल्य भी लगभग इतना ही होगा।

ठीक इसी प्रकार से रुद्राक्ष के मुखों के हिसाब से भी रुद्राक्ष का मूल्य कम ज्यादा होता है। पांचमुखी रुद्राक्ष सबसे कम मूल्य में मिल जाता है जिसके एक दाने की कीमत लागभग 10-15 पैसे होती है।

इससे जितने मुख अधिक होते जायेंगे रुद्राक्ष की कीमत भी बढ़ती जायेगी और जितने मुख कम होते जायेंगे तो भी कीमत बढ़ जाएगी।
पांचमुखी रुद्राक्ष चूंकि सस्ता होता है इसलिए उसमें बेईमानी नहीं होती लेकिन कुछ  बेईमान  व्यापारी सात और आठ मुखी रुद्राक्ष नकली नालियां बनाकर तैयार करते हैं। यदि आप ध्यान से देखेंगे तो आपको पता लग सकता है कि यह नकली बना है या असली|

इसी प्रकार से तीन मुखी रुद्राक्ष की एक या दो नालियां खत्म करके दो मखी और एक मुखी रुद्राक्ष बनाया जाता है। किन्तु गौर से देखने पर इसका पता भी लग जाता है। एक मुखी रुद्राक्ष आजकल लगभग अप्राप्य है इसलिए उसका मूल्य हजारों रुपयों में आंका जाता है।

कुछ लोग बेर की गुठलियों की माला भी रुद्राक्ष कहकर बेच देते हैं।परन्तु बेर की गुठली पर न तो धारियां ही होती हैं और न ही उसके पृष्ठ पर मुद्रायें बनी होती है।

लकड़ी के बढ़िया कारीगर लकड़ी पर खोदकर भी रुद्राक्ष तैयार करते हैं जिसके तैयार करने में उन्हें 15-20 दिन तक लग जाते हैं और ये कारीगर उसे नेपाल में ले जाकर बेचते हैं।

नेपाल जाने वाले यात्री इसे वहां से खरीदकर पुनः भारत ले आते हैं। यह नकल केवल एक मुखी रुद्राक्ष के अप्राप्य होने के कारण हो रही है। असली एक मुखी रुद्राक्ष का मूल्य एक लाख रुपये तक आंका जाता है और नेपाल में रुद्राक्ष का व्यापारी ग्राहक को यह विश्वास दिलाता है कि सबसे अधिक रुद्राक्ष नेपाल में पाया जाता है इसलिए वह उसे 5-10 हजार में बेचकर ठग लेते हैं। इसलिए रुद्राक्ष खरीदते समय ग्राहक को पूरी सावधानी से खरीदना चाहिए।

रुद्राक्ष अमूल्य वस्तु है। जैसे भी हो इसे कहीं से भी प्राप्त करके परीक्षा करके धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष के विषय में धारक को किसी प्रकार से भ्रम में न पड़कर श्रद्धा एवं विश्वास के साथ धारण करना चाहिए।

रुद्राक्ष धारण करने के 40 दिन के अन्दर जिस कार्य के लिए आप इसे धारण करेंगे उसमें लाभ अवश्य होगा।
सोने अथवा चांदी के तारों में पिरोकर इनकी माला धारण करनी चाहिए। इसके अभाव में लाल धागे का प्रयोग कर सकते हैं।

(Rudraksha ki pahchan)

रुद्राक्ष की माला धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष इन चारों फलों को प्रदान करने वाली है। संसार में इसके समान और कोई माला फलदायी नहीं है।
कुछ लोगों को भ्रम है कि इसे साधु-महात्मा ही पहनते हैं लेकिन ये उनकी भूल है।
संन्यासियों को जहां इसे धारण करने पर धर्म और मोक्ष की प्राप्ति होती है तो वहां सांसारिक प्राणी को इसे धारण करने से धर्म – की मर्यादा में रहकर अर्थ और काम का उपभोग करते हुए मोक्ष मिलता है।

संसार के अनेक प्रकार के भौतिक दुखों में संतप्त मनुष्यों के लिए यह शिव का वरदान है। इसे गृहस्थी और साधु सभी धारण कर सकते हैं। रुद्राक्ष धारण करने वाले की अकाल-मृत्यु नहीं होती यह अनुभूत सत्य है।

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